चित्रकार तौक़ीर की याद में काव्य गोष्ठी /मुशायरा एवं ग़ज़ल संग्रह का विमोचन
प्रोफ़ेसर एस ए जाफ़र ‘तौक़ीर सा’ के ग़ज़ल संग्रह “जज़्बात के रंग हज़ार” का विमोचन
रिपोर्ट-अज़मी रिज़वी-अकरम खान
लखनऊ। तौक़ीर आर्टकेड, आर्ट फ़ैमिली मार्ग, शाहजहांपुर मे एक काव्य गोष्ठी एवं मुशायरे का भव्य आयोजन किया गया।उक्त कार्यक्रम में अलीगढ़ से आए एसए जाफ़र उर्फ़ तौक़ीर सा के काव्य संग्रह “जज़्बात के रंग हज़ार” का विमोचन भी हुआ।इस दौरान लगभग 25 प्रसिद्ध कवि एवं शायरो ने अपनी कविताओं,नज़्मों एवं ग़ज़लों के माध्यम से समाज को बौद्धिक रूप से समृद्ध करते हुए कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।कार्यक्रम की अध्यक्षता विशिष्ट कवि एडवोकेट सत्येंद्रनाथ त्रिपाठी ने की।वही मुख्य अतिथि के रूप में डिप्टी कमिश्नर (जी.एस.टी.) श्री पीके तोमर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आग़ाज़ किया।विशिष्ट अतिथियों में जनाब अशफ़ाक़ उल्ला खां,डॉ. प्रभात शुक्ला,नरेंद्र सक्सेना,डॉ. अमीर सिंह एवं डॉ.आलोक सिंह रहे।

कार्यक्रम के इस अवसर पर साहित्य संस्था इदराक और नज़र मेमोरियल सोसायटी, शाहजहांपुर की जानिब से शायर एस ए जाफ़र ‘तौक़ीर सा’ को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।इसके अतिरिक्त सम्मान के क्रम में आप को इदारा उफ़ुक़-ए- नौ व दर्पण सामाजिक संस्था,शाहजहांपुर द्वारा ‘कला रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया।तदोपरांत साहित्यकार कमलेश द्विवेदी एवं चित्रकार डॉ. ऊषा गर्ग ने तौक़ीर सा के ग़ज़ल संग्रह ‘जज़्बात के रंग हज़ार’ की समीक्षा प्रस्तुत की।कार्यक्रम के आयोजक डॉ. मोहम्मद क़मर ने सभी सुख़नवरो को बुके दे कर उनका स्वागत किया।गोष्ठी का संचालन एडवोकेट एवं प्रसिद्ध शायरा गुलिस्तां ख़ान ने किया।
आमंत्रित कवियो एवं शायरो में प्रमुख रूप से असग़र यासिर,अजय अवस्थी,शाहिद रज़ा,ख़ालिद क़ैसर,ख़लीक़ शौक़,हमीद ख़िज़र, गुलिस्तां ख़ान,वसीम मीनाई,फ़हीम बिस्मिल,राशिद हुसैन राही, कमलेश द्विवेदी,अस्मत अली, वाजिद हुसैन वाजिद,उवैस शिफ़ा, राशिद नदीम,फ़ैसल फ़ैज़, सबा नक़वी सबा,डॉ. शाइस्ता नसीम, मुनीब अहमद,तौक़ीर सा,सत्येंद्रनाथ त्रिपाठी, रतीश गर्ग आदि ने अपने सुख़न से समाज को बौद्धिक रूप से समृद्ध करते हुए जीवन दर्शन एवं सामाजिक सरोकारों को कलात्मक स्वरूप प्रदान किया जो मानव जाति के लिए अमृत से कम नहीं।

मानवता, प्रेम, समाज तथा दर्शन के विभिन्न पहलुओं के मद्दे नज़र अपनी भावनाओं को प्रकट करने वाले शायरों एवं कवियों में असग़र
यासिर का शेर-“
‘शुमार कैसे करूं दोस्तों की सफ़ में उसे,
मैं एक क़तरा हूं_दरिया बता रहा है मुझे’
हमीद ख़िज़र पढ़ते हैं
‘हम इस तरह भी मोहब्बत को आम करते हैं,
मिले जो राह में_पहले सलाम करते हैं’
वसीम मिनाई कहते हैं कि –
‘उन्हें रुसवाइयों का सामना करना ही पड़ता है,
जो ख़ुद्दारी कि अपनी ख़ुद निगहबानी नहीं करते’
अलीगढ़ से आए शायर तौक़ीर सा कुछ यूं बयान करते हैं
‘चादर हटाओ देखूं ज़रा क्या है साथ में,
मर तो रहा था ऐसे के सब ले के जाएगा’
ख़लीक़ शौक का शेर
‘तू छत पे आके दिखला दे_ जो अपना चांद सा चेहरा,
मेरी भी ईद हो जाए तेरा दीदार हो जाए’
कवि अजय अवस्थी अपनी भावनाओं को कुछ यूं व्यवस्थित करते हैं
‘नादान है_ख़ुदा के जैसा होना चाहता है,
बेटा आपने बाप के बराबर होना चाहता है’
वहीं शायरा सबा नक़वी सबा
कहती हैं-
ख़ुशियों को ढूंढती रही सारे जहान में,
वो दब के मर गईं मिरे दिल के मकान में’
उक्त कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वालों में शहर के तमाम गणमान व्यक्तियों में डॉ ऊषा गर्ग,अहसन’ जलील,अर्शियान अर्श,दिनेश सिंह, उस्मान ख़ान,मोहम्मद रफ़ी,मोहम्मद तैयब, अजय द्विवेदी,मोहम्मद हसन,सदफ़ ख़ान,ज़ुल्फ़िकार अहमद, रामनयन वर्मा,मुनीर अहमद, अरविंद शुक्ला,परवेज़ अहमद खां,हफ़ीज़ ख़ान,जावेद ख़ान, ज़ुल्फ़िकार, इमरानुद्दीन, सैयद ज़फ़र,सैयद क़मर, बलराम शर्मा, मोहम्मद मुसतफ़ा आदि प्रमुख रहे।उक्त कार्यक्रम की जानकारी डॉक्टर मोहम्मद क़मर (चित्रकार/ संचालक- तौक़ीर आर्टकेड ने दी।
