शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा,न्याय में विलंब संभव है परंतु न्याय से वंचित होना स्वीकार्य नहीं अभिषेक सिंह
उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के जनपदीय कार्यालय पर आयोजित पदाधिकारियों की बैठक में बोले जिलाध्यक्ष
बाराबंकी। लोकसभा में शिक्षा राज्य मंत्री माननीय जयंत चौधरी द्वारा टीईटी-विहीन शिक्षकों के संबंध में दिए गए हालिया लिखित उत्तर में यह स्पष्ट किया गया है कि नियमानुसार निर्धारित अर्हताओं का पालन अनिवार्य है तथा शिक्षकों को प्रचलित मानकों के अनुरूप योग्यता पूर्ण करनी होगी।उक्त लिखित उत्तर के संदर्भ में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह ने बड़ेल स्थित संगठन के जनपदीय कार्यालय पर आयोजित पदाधिकारियों की बैठक में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह विषय केवल तकनीकी योग्यता का प्रश्न नहीं है, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सम्मान,अधिकार और न्याय से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप विधिवत रूप से की गई तथा जिन्होंने दीर्घकाल तक निर्विवाद सेवा प्रदान की है, उन पर सेवा के अंतिम चरण में नई योग्यता की शर्त आरोपित करना न तो नैतिक दृष्टि से उचित है और न ही विधिक रूप से न्यायसंगत प्रतीत होता है।श्री सिंह ने यह भी कहा कि एनसीटीई के गजट में स्पष्ट उल्लेख है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षक इस बाध्यता से मुक्त रहेंगे। इस महत्वपूर्ण तथ्य का लिखित उत्तर में उल्लेख न किया जाना अत्यंत खेदजनक है। शिक्षकों की अपेक्षा है कि तथ्यों को पूर्णता एवं पारदर्शिता के साथ संसद के समक्ष रखा जाए।उन्होंने आगे कहाकि शिक्षक समाज का माननीय सर्वोच्च न्यायालय पर पूर्ण विश्वास है। जिन बिंदुओं को पूर्व में समुचित रूप से प्रस्तुत नहीं किया जा सका था,उन्हें पुनर्विचार याचिकाओं के माध्यम से न्यायालय के समक्ष रखा गया है।विभिन्न राज्य सरकारें एवं शिक्षक संगठन इस विषय में सक्रिय हैं और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सकारात्मक समाधान की अपेक्षा की जा रही है।बैठक में मुख्य रूप से विजय सिंह यादव,सुधीर चौधरी,सौरभ वर्मा,चंद्रशेखर सिंह,विनीत सिंह,सीमा यादव,अनुमेहा सिंह,अतुल यादव,गिरीश जायसवाल,संतोष सिंह,आदर्श सोनी,आनंद प्रकाश,विशेष सिंह सहित अनेक शिक्षक पदाधिकारी उपस्थित रहे।



