किसी भी समाज या राष्ट्र के विकास के रूप में सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है प्रदीप फैलबस
दि लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट आफ इंडिया की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर कार्यक्रम सम्पन्न
रिपोर्ट-अज़मी रिज़वी-नूर मोहम्मद
मसौली बाराबंकी। दुनिया में सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। सेवा चाहे व्यक्ति के रूप में हो या संस्था के रूप में, किसी भी समाज या राष्ट्र के विकास के रूप में सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।उक्त विचार दि लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट आफ इंडिया की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर टीएलएम. हास्पिटल बाराबंकी द्वारा आयोजित दि लेप्रोसी मिशन की 150 वर्ष की यात्रा एवं परमेश्वर को धन्यवाद कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि प्रदीप फैलबस ने कही।सीपी पैलेस मे आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित एव पाश्चर नियाज़ की परमेश्वर की प्रार्थना से हुई। प्रदीप फैलबस ने कहा कि अस्पताल के प्रत्येक कर्मचारी का दायित्व बनता है की उनके मन से उनके वचन से उनके कर्म से मरीजों की सेवा होनी चाहिए । अस्पताल चलाने का उद्देश्य मात्र पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि दि लेप्रोसी मिशन के संस्थापक डॉक्टर वेलेसली बेली कास्बाय ने दि लेप्रोसी मिशन की स्थापना कर रोगी की सेवा के माध्यम से परमेश्वर की सेवा करना है।टीएलएम हॉस्पिटल के अधीक्षक डा तिमोथी मैक्सिमस ने सेवानिवृत्ति कर्मचारी एवं उनके परिवार के सदस्यो को उपहार भेंट कर सम्मानित किया तथा कार्यक्रम के आयोजक एवं संरक्षक प्रशासनिक अधिकारी दिलीप बर्मन ने स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि वर्तमान में पूरे भारतवर्ष में दि लेप्रोसी मिशन द्वारा संचालित 15 हॉस्पिटल 6 व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र एवं 6 सेवालय संचालित है जिनके माध्यम से हम कुष्ठ पीड़ित जनों का शारीरिक मानसिक आर्थिक उत्थान कर उनका सामाजिक पुनर्वास करते हैं हमारा उद्देश्य है कुष्ठ रहित संसार रहे.और डॉक्टर नीता मैक्सिमस ने अंत में परमेश्वर को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी मेहमानों को धन्यवाद दिया। और कहाकि हम सब मिलकर दि लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट इंडिया सदियो से सदियो तक चले तथा परमेश्वर सेवा के रूप मे मानव सेवा होती रहे।इस दौरान टी एल एम हॉस्पिटल फ़ैजाबाद,बाराबंकी के स्टॉफकर्मियों के आलावा तमाम लोग मौजूद रहे।
