राहुल अखिलेश की असफल जोड़ी अपने अरमानों के साथ फिर मैदान मे है वसीम राईन
रिपोर्ट-अज़मी रिज़वी-अकरम खान
बाराबंकी। गठबंधन कर चुनाव में उतरने का प्रयोग कोई नई बात नही है। राहुल अखिलेश की असफल जोड़ी अपने अरमानों के साथ फिर मैदान में हैं और इन्हें एक बार फिर निराशा ही हाथ लगेगी। इनकी नीयत, फितरत, आदतें और किरदार से जनता बखूबी वाकिफ है और इन्हें सबसे बड़ा झटका पसमांदा मुसलमान ही देगा,जिसे इस्तेमाल करने के अलावा इन दोनों ने कुछ नही किया।
यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने अपने बयान में कही। उन्होंने सपा कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सपा ने पसमांदा मतों का इस्तेमाल सिर्फ सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए किया जबकि कांग्रेस ने पसमांदा के साथ बुरा बर्ताव करते हुए आर्टिकल 341 के जरिये धार्मिक प्रतिबंध लगा दिए।इसके उलट पसमांदा मुसलमान इन पर भरोसा करते हुए साथ देता रहा। दोनों ही दलों ने सत्ता,सदन से लेकर संगठन तक कहीं भी मौका नही दिया,सपा ने तो राज्यसभा तक नही भेजा।सपा कांग्रेस का रवैया इस कदर बेरुखा यूं ही नही रहा बल्कि दोनो दल जानते थे कि पसमांदा मुसलमान अगर अपने पैरों पर खड़ा हो गया और बुनियादी तरक्की हासिल कर ली तो इनकी कलई खुल जाएगी और सत्ता में आने की चाभी खो देंगे।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहाकि दोनों राजकुमार भाजपा को पसमांदा मुसलमान का दुश्मन बताते रहे जबकि इसी भाजपा से पीएम मोदी ने पसमांदा समाज की फिक्र की, साथ लेकर चलने की बात कही और आज संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे अहम पद पर बैठा व्यक्ति पसमांदा समाज से ही है।सपा कांग्रेस ने तो इतना भी नही किया। बस वोटबेंक बनाकर रखा।इनको पसमांदा समाज भली भांति पहचान चुका है और इनके झांसे में नही आने वाला।