राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर विराट कवि सम्मेलन सम्पन्न
रामनगर बाराबंकी। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत जुरौंडा मे सत्ती माता मंदिर परिसर में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।प्रदेश एवं क्षेत्र के नामचीन कवियों ने राष्ट्रप्रेम भक्ति सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत काव्यपाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।मुख्य अतिथि गौरीकांत दीक्षित ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया।इस अवसर पर उन्होंने अपने उद्बोधन में कहाकि कविता समाज की आत्मा होती है। जब कविता राष्ट्र धर्म और मानवीय मूल्यों से जुड़ती है तो वह समाज को दिशा देने का कार्य करती है।राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का यह अवसर हमारी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।कवि सम्मेलन का आयोजन युवा कवि हर्ष प्रधान के संयोजन में किया गया जबकि संचालन प्रसिद्ध कवि विकास बौखल ने किया।इस कार्यक्रम की शुरुआत लखनऊ से पधारीं कवियत्री वंदना विशेष ने सरस्वती वंदना से की जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।इसके बाद युवा कवि ने मात्र भूमि राष्ट्र प्रेम हेतु की जननी दयानिधि महान महामाई है का सशक्त पाठ कर श्रोताओं में राष्ट्रप्रेम का जोश भर दिया।कवि रणधीर सिंह ने नेह गागर में सागर उठाए हुए नीर नयनों का सबसे छुपाए हुए सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।कवियत्री ईशा मिश्रा ने बचपन के ख्वाबों को सँजोए रह जाते हैं बड़े होते-होते ज़िम्मेदारियों में खोए रह जाते हैं जैसी मार्मिक पंक्तियों से खूब तालियां बटोरीं।वरिष्ठ कवि डॉ. शर्मेश शर्मा ने हास्य-व्यंग्य रचना अबकी भैया शिवबरदानी का करिहौ अगले साल होई प्रधानी का करिहौ सुनाकर श्रोताओं को ठहाकों से भर दिया।संचालक कवि विकास बौखल ने“किसी खंजर से ना तलवार से जोड़ा जाए सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए की प्रस्तुति देकर भाईचारे और मानवता का संदेश दिया।इसके अतिरिक्त कवि प्रमोद पंकज नीरज निर्मोही राज सिंह गोपाल त्रिपाठी और अंकुर पाठक ने भी अपनी-अपनी रचनाओं से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।कार्यक्रम की अध्यक्षता शीतल बख्श सिंह ने की।इस अवसर पर समाजसेवी अखिलेश सिंह,शिक्षक अजय सिंह,पी सिंह,लल्लू तिवारी,विकास सिंह,आशीष सिंह,रामनिवास अवस्थी सहित बड़ी संख्या मे क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक व श्रोतागण उपस्थित रहे।कवि सम्मेलन देर शाम तक चला और हर प्रस्तुति पर श्रोताओं की तालियों से पूरा परिसर गूंजता रहा।



