एवान-ए-ग़ालिब में जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण को लेकर ऐतिहासिक सर्वधर्म सम्मेलन आयोजित
देशभर के शिया उलेमा, सूफ़ी खानकाहों, सामाजिक संगठनों, सांसदों और सर्वधर्म प्रतिनिधियों ने उठाई आवाज़
नई दिल्ली। राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित एवान-ए-ग़ालिब में अल बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन और सूफ़ी इस्लामिक बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर एक ऐतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण सर्वधर्म सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में मदीना मुनव्वरा स्थित जन्नतुल बक़ी में हज़रत रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की साहबज़ादी, अहलेबैत और अनेक सहाबा की मज़ारों को लगभग सौ वर्ष पूर्व सऊदी अरब द्वारा ध्वस्त किए जाने के मुद्दे पर गहरी पीड़ा व्यक्त की गई तथा उनके पुनर्निर्माण की मांग को जोरदार ढंग से उठाया गया।
सम्मेलन का उद्देश्य जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण की मांग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाना, साथ ही विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच अमन, भाईचारे और जागरूकता का संदेश पहुंचाना रहा।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व इसी विषय पर अजमेर शरीफ़ और देवा शरीफ़ में भी सर्वधर्म सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। दिल्ली का यह आयोजन इस अभियान की तीसरी महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
कार्यक्रम में देशभर से शिया समुदाय के प्रमुख धर्मगुरुओं, बड़ी सूफ़ी खानकाहों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न धर्मों के गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की।

प्रमुख उपस्थित हस्तियों में मौलाना कल्बे जवाद नकवी, मौलाना महबूब मेहदी, मौलाना आज़ादार हुसैन (दिल्ली), मौलाना असलम (पूना), मौलाना शफ़ीक हसन शफ़क़ (लखनऊ) तथा मौलाना इफ़्तिख़ार हुसैन इंक़लाबी (लखनऊ) विशेष रूप से शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त पंजाब के होशियारपुर स्थित सर्वधर्म ख़्वाजा मंदिर से जनाब सूफ़ी राज जैन साहब एवं माता कनीज़ सकीना, अजमेर से फ़ज़ले मोईन चिश्ती साहब, सूफ़ी इस्लामिक बोर्ड से मंसूर खान साहब, ईरानी कल्चर हाउस से मौलाना सादिक हुसैनी साहब, दिल्ली स्थित हज़रत निजामुद्दीन औलिया दरगाह से अंफाल निज़ामी साहब, तथा नारायण फ़ाउंडेशन से जनाब विवेक मौर्य साहब वा लद्दाक से तशरीफ़ लाये श्री सज्जाद करगिली जी की उपस्थिति ने सम्मेलन को विशेष गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना कल्बे जवाद, जम्मू से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी और आसिम वक़ार ने इस घटना को एक स्वर में मानवता विरोधी और इतिहास के लिए अत्यंत दुखद घटना करार दिया।
वक्ताओं ने कहाकि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जुड़ी पवित्र हस्तियों की मज़ारों को ध्वस्त किया जाना इस्लामी इतिहास, धार्मिक विरासत और करोड़ों मुसलमानों की आस्था पर गहरा आघात है।
मौलाना कल्बे जवाद साहब तथा मौलाना शफ़ीक हसन शफ़क़ साहब ने इसे “दिल में मौजूद गहरा ज़ख्म” बताते हुए कहा कि
“जब तक जन्नतुल बक़ी का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता, हमें सुकून नहीं मिलेगा।”
वहीं सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने इसे “अपने दौर की सबसे विभत्स और दर्दनाक घटनाओं में से एक” बताते हुए कहा कि यह केवल मज़ारों का ध्वंस नहीं, बल्कि पूरी उम्मत की धार्मिक भावनाओं और साझा विरासत पर गहरा प्रहार है। उन्होंने कहा कि जन्नतुल बक़ी का मसला दुनिया भर के मुसलमानों के जज़्बात से जुड़ा हुआ है और इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीरता से उठाया जाना चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता श्री सज्जाद करगिली ने जोर देते हुए कहा,
“सऊदी हुकूमत को वहाँ मज़ारात का पुनः निर्माण करना ही होगा। यह दुनिया के तमाम मुसलमानों और अहलेबैत से अकीदत रखने वालों के दिल की आवाज़ है। जब तक वहाँ रौज़े का निर्माण नहीं हो जाता, हम खामोश नहीं बैठेंगे।”
सम्मेलन में उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर में दुनिया के तमाम अमन-पसंद लोगों, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और भारत सरकार से अपील की कि वे सऊदी हुकूमत के समक्ष इस विषय को गंभीरता से उठाएं और मदीना मुनव्वरा में ध्वस्त की गई इन पवित्र मज़ारों के पुनर्निर्माण की मांग रखें।
कार्यक्रम के अंत में अल बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन की ओर से आयोजक सलमान रिज़वी साहब ने सभी उलेमा, सूफ़ी प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और विभिन्न धर्मों के लोगों का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया।
उन्होंने कहा,
“यह मांग और इस प्रकार के आयोजन तब तक जारी रहेंगे, जब तक सौ वर्ष पूर्व ध्वस्त की गई इन पवित्र मज़ारों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता।”
