विद्यार्थियो ने ली शपथ,मिट्टी के दीये प्रज्जवलित कर मनायेगे दीपावली
आधुनिकता की दौर में हम अपनी परंपराओ से होते जा रहे दूर
रिपोर्ट-अज़मी रिज़वी-अशोक कुमार सिंह
रामनगर बाराबंकी। दीपावली के पावन पर्व को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है।आदि काल से दीपावली पर मिट्टी का ही दीपक जलाने की परंपरा रही है।मिट्टी के दीपो को कतारबद्ध सजाना उसमें तेल भरना बाती रखना और फिर उसे प्रज्जवलित करना अद्भूत अनुभव की अनुभूति कराता है।लेकिन बीते दो दशक से हमारा समाज कृत्रिम दीपो पर अधिक निर्भर हो रहा है।आधुनिकता की दौर मे हम अपनी परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं।इन परिस्थितियो को देखते हुए इस दीपावली पर हमें मिट्टी का दीपक जलाने का संकल्प लेना है।इसी उद्देश्य के साथ प्रबंध समिति विद्यालय के अध्यक्ष रमेश चंद तिवारी व प्रबंधक डॉ संजय तिवारी के निर्देश पर गायत्री चिल्ड्रेन एकेडमी रामनगर बाराबंकी के विद्यार्थियो ने आओ मिट्टी का दीप जलायें और पर्यावरण को सुरक्षित बनाये रखने के क्रम में छात्र-छात्राओं शिक्षक-शिक्षिकाओं को दीपावली पर मिट्टी के दीप जलाने का संकल्प दिलाया गया।विद्यालय की प्रधानाध्यापिका आरती तिवारी व कोऑर्डिनेटर प्रखर तिवारी के नेतृत्व में विद्यालय के सभी विद्यार्थियो ने यह शपथ ली कि मिट्टी के दीये प्रज्जवलित कर दीपावली मनायेंगे और पर्यावरण बचायेंगे।विद्यालय के प्रबंधक श्री तिवारी ने कहा कि दीपावली के पर्व पर मिट्टी का दीपक जलाने से मंगल और शनि ग्रह दोनो मजबूत होते है।मिट्टी का दीपक जलाने से लक्ष्मी का वास होता है।इसके साथ ही परिवार के सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है।मिट्टी के दीये को शुभता का प्रतीक माना जाता है।मिट्टी के दीये में पंचतत्व होते हैं।मिट्टी के दीये जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है।पूर्वजो की ओर चलाई जा रही इस परम्परा का लाभ की दृष्टि से भी बड़ा महत्व है।इस मौके पर शिक्षिका मन्नो देवी, प्रतिभा सिंह, पूजा चौबे, प्रज्ञा तिवारी, प्राची यादव, पिंकी मौर्या, धारा देवी सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।
