कांग्रेस ने पसमांदा मुसलमानो को बुनियादी तरक्की से महरूम कर दिया वसीम राईन
रिपोर्ट-अज़मी रिज़वी-अकरम खान
बाराबंकी। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने कहा है कि कांग्रेस ने पसमांदा मुसलमान को जिस पिंजरे में कैद कर रखा है, उससे मुक्त करना उनकी सरकार का ही दायित्व था पर ऐसा न करके इस समाज को बुनियादी तरक्की से महरूम कर दिया गया। आखिर कोई तो इस बेवजह सजा की जिम्मेदारी लेगा। पसमांदा समाज इस अन्याय का लगातार विरोध और कांग्रेस की निंदा करता आ रहा तो इसमें गलत कुछ भी नही।
उन्होंने कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज के हितों की रक्षा वा उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना संगठन का नैतिक दायित्व तो है ही साथ ही उनकी आवाज सत्ता वा सदन तक पहुंचाना वाजिब भी। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि संविधान लागू होने के बाद पंडित नेहरू सरकार ने अनुसूचित जाति आरक्षण पर दो शर्ते लगाई। इसके अनुसार आर्टिकल 341/3 10 अगस्त 1950 के तहत यह आरक्षण सिर्फ़ हिन्दुओं को मिलेगा। दूसरी शर्त 23 जुलाई 1959 के अनुसार मुसलमान हिन्दू बने तो ये आरक्षण दिया जाएगा। ( धर्मन्त्रण के लिए प्रोत्साहन हेतु )। आर्टिकल 341 के जरिए पसमांदा मुस्लिम समाज पर धार्मिक प्रतिबंध लगाकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस मुद्दे पर कभी न कुछ कहा और न ही अपनी सफाई ही दी मतलब साफ है कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं था और न है। लगातार कांग्रेस के साथ रहकर उसे सत्ता तक पहुंचाता रहा पसमांदा समाज बदले में कोई अपेक्षा न रखते हुए साथ देता चला गया,समाज के इस भाव का नाजायज फायदा कांग्रेस ने लंबे समय तक उठाया।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि आज कांग्रेस के अत्याचार के खिलाफ जागरूक हुआ समाज अपनी आवाज बुलंद कर रहा, हर मंच पर सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा बता रहा तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। गलत का विरोध करने का अधिकार संविधान ने दिया है और इसे कोई छीन नही सकता। पसमांदा समाज कांग्रेस के खिलाफ यूं ही नहीं अगर कांग्रेस ने समय रहते पसमांदा समाज को धार्मिक प्रतिबंध से मुक्त कर दिया होता तो आज के समय में यह समाज भी अन्य वर्गो की तरह विकास वा तरक्की की राह पर कदमताल कर रहा होता पर कांग्रेस का रुख पसमांदा समाज के लिए शत्रुता भरा रहा।
