मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी के आदर्शों पर चलकर परम पद की प्राप्ति संभव रामजी शास्त्री
रिपोर्ट-अज़मी रिज़वी-सचिन गुप्ता
सिरौलीगौसपुर बाराबंकी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी के बताए गए आदर्शो पर चलकर मानव परम पद को प्राप्त कर सकता है।यह बात ग्राम टिकुरी स्थित संकटा माता मंदिर पर श्रीराम कथा के दौरान अयोध्याधाम से आए कथा व्यास राम जी शास्त्री ने कही।उन्होने कहाकि भगवान राम के जन्म के बाद पूरे अयोध्या में शहनाई आवाज गूंज रही थी।श्री राम की बाल लीला संसार की सकारात्मक एवं सुखद आनंदमई लीला है भगवान राम जब दशरथ के आंगन में बिहार करते हैं महाराज दशरथ उन्हें भोजन के लिए बुलाते है तो वह समता के पोषक होकर बाल शाखाओ के साथ खेला करते है और वह भोजन के लिए नहीं आते हैं।किंतु जब माता कौशल्या उन्हें वात्सल्य भाव से बुलाती है तो वह ठुमक, ठुमक, कर उनके पास चले आते है।आगे कथा में श्री शास्त्री जी ने बताया कि भगवान राम के साम्यवादी व समतामूलक चिंतन स्पष्ट होता है। बाल्यावस्था में उनकी लीलाओं के दर्शन करने के लिए देवता भी तरसते थे।भगवान शिव खुद ही वीर हनुमान के साथ वेश बदलकर भगवान राम की बाल लीलाओं के दर्शन करते आए थे।आगे कथावाचक ने कहा कि श्री राम कथा का श्रवण कर उनका अनुसरण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।हमे भगवान श्री राम द्वारा स्थापित किए गए आदर्शों पर चलने का प्रयास करना चाहिए।कथावाचक ने कहा जब जीवन में निराशा छा जाए तो व्यक्ति को संत की शरण में जाना चाहिए।संत राष्ट्र हितकारी होता है भक्तों के बीच कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि अगर सुख दुख नही होता तो प्रभु की याद न आती ,अंधेरे में रहने वाले लोग ही प्रकाश के महत्व को भलीभांति समझ पाते है।रात्रि मे बाल्य कलाकारो द्वारा मनमोहक झांकियां की प्रस्तुति की गयी।इस अवसर पर सरस कथावाचिका शालिनी किशोरी बाराबंकी,सरस कथावाचिका आचार्य कल्याणी साध्वी लखनऊ आयोजक हरिश्चंद्र यादव, रोहित यादव,मोहित यादव,इन्द्रसेन रावत, मनोज यादव,शैलेंद्र यादव,अजय यादव,विजय यादव,आलोक यादव सहित सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।
