बाराबंकी में अय्यामे अजा के आखिरी दिन शहीदाने करबला के गम में डूबे अजादार
नम आंखों से या हुसैन अलविदा किया बुलंद,मजलिस मातम के साथ निकला जुलूस
रिपोर्ट-अज़मी रिज़वी-अकरम खान
बाराबंकी। अय्यामे अजा के आखिरी दिन शहीदाने करबला की याद में श्रद्धा और गम का माहौल छाया रहा। 8 रबीउल अव्वल को सुबह से ही देवा रोड स्थित गुलाम असकरी हाल में अजादार जुटने लगे थे।उनके काले कपड़े और नम आंखें शहीदों के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शा रही थीं।आसमान से हो रही बारिश इस गमगीन माहौल को और भी गहन बना रही थी, मानो कुदरत भी शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रही हो।मजलिस की शुरुआत इमामे जुमा मौलाना मोहम्मद रजा जैदपुरी ने की।उन्होने करबला के शहीदों की शहादत का दर्दनाक मंजर पेश किया और उपस्थित जनसमूह को भावनात्मक रूप से जोड़ा।उनके भाषण ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रकट किया और शहीदों के प्रति सम्मान और प्रेम को मजबूती दी।मजलिस के बाद अंजुमन गुलाम ए असकरी के तत्वाधान में अजादारों ने मातम किया।बारिश की बौछारों के बावजूद,मातमी जुलूस ने श्रद्धा और गहराई के साथ अपना मार्ग जारी रखा।जुलूस ने आनंदभवन,देवा रोड, घोसियाना,छाया चौराहा और सिविल लाइंस होते हुए करबला तक की यात्रा की।इस दौरान हुसैनियत जिंदाबाद और यजीदियत मुर्दााबाद के नारों से इलाका गूंज उठा,जो शहीदों की याद में एक गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।करबला में आयोजित अलविदाई मजलिस में हुज्जातुल इस्लाम मौलाना जवाद असकरी ने खिताब किया।उन्होने भावुकता के साथ कहा,अगर हम अगले साल भी जिंदा रहे तो हम यहाँ होंगे, और अगर हम नहीं रहे तो यह हमारा अंतिम सलाम है।उनके शब्दों ने शहीदों के प्रति श्रद्धा और गहराई को व्यक्त किया और उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।अलविदाई मजलिस के बाद,नमाजे जमात मौलाना जवाद असकरी ने अदा की।उन्होने भारत की तरक्की, सेव वक्फ इंडिया मिशन के साथ दुनिया में अमन के लिए दुआ की।उनकी प्रार्थना ने शांति,एकता और सामाजिक विकास की दिशा में एक सकारात्मक संदेश भेजा।इसके बाद हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तहकीक हुसैन जैदपुरी ने इमामे जमाना लाइब्रेरी हाल में आखिरी मजलिस को खिताब किया।उन्होने आपसी भाईचारे और एकता की महत्वता को बताते हुए एक मजबूत हुसैनी समाज बनाने का सन्देश दिया। उनके शब्दों ने समाज में एकता और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित किया और धार्मिक समुदाय की एकजुटता को बढ़ावा दिया।उन्होंने आपसी एकता पर बल दिया।अंत में शहीदाने के दर्दनाक मसायब पेश किए,मजलिस से पूर्व, शायरो के द्वारा कलाम किया गया। बाकर बाराबंकवी ने कार्यक्रम का संचालन किया और पेश ख्वानी की, जिससे शहीदों की शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।शायरो ने इस महत्वपूर्ण अवसर की भावनात्मक गहराई को और भी बढ़ाया।मजलिस के बाद, अलम जुलजनाह और अमारी ताबूत का जुलूस निकाला गया। इसमें कानपुर,रायबरेली,उन्नाव,जायस और अयोध्या से आई अंजुमनों ने भाग लिया और नवहा ख्वानी की।यह जुलूस शहीदों की शहादत की याद में मातम करने और श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।आज का आयोजन बाराबंकी में करबला के शहीदों के प्रति श्रद्धा और गम का दिन था,जिसने समाज को शांति, एकता और सहयोग की दिशा में प्रेरित किया।इस अवसर पर इमामे जुमा मौलाना मोहम्मद रजा जैदपुरी,मौलाना जवाद असकरी,गुलाम असकरी हाल के मुंतजिमे आला जहीर जैदी,सादिक हुसैन ने डीएम एसपी समेत सभी अधिकारियों के सहयोग के लिए आभार प्रकट किया
