सपा का पीडीए सिर्फ एक ढकोसला,दिखावा और तथाकथित समाजवाद,हकीकत कुछ और-वसीम राईन
रिपोर्ट-अज़मी रिजवी-अकरम खान
बाराबंकी। सपा का नया हथकंडा है पीडीए। इसकी आड़ में सपा मुखिया अपना मतलब साध रहे हैं बल्कि शतरंज की चाल चल रहे। वैसे तो यूपी को पीडीए का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताया गया था लेकिन उस मतलब के मुताबिक पीडीए अब तक खुद को साबित नही कर सका। अखिलेश यादव का पीडीए सिर्फ एक ढकोसला, दिखावा और तथाकथित समाजवाद है। जिसका सीधा सा अर्थ अपना फायदा और बाकी सबको मूर्ख बनाना है।यह बात ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने अपने बयान में कही है। उन्होंने कहा कि सत्ता से लंबे समय से वंचित कांग्रेस के साथ ही समाजवादी पार्टी के मुखिया वह सबकुछ कर रहे जिससे उन्हें वापसी का एक मौका मिल जाए पर दुर्भाग्य से वह दोनो ही सफल नहीं हो पा रहे।इसी सिलसिले में अखिलेश यादव ने पीडीए का नया राग अलापा। कहा कि सपा पीडीए यानी पिछड़ा दलित वा अल्पसंख्यक के लिए राजनीति करेगी पर हुआ इसके ठीक उलट।कई चुनाव हुए, कई मौके आए पर सपा यादव मोह से ऊपर नहीं उठ सकी। वर्तमान की ही बात करें तो लोकसभा में नेता विपक्ष स्वयं अखिलेश यादव, विधानसभा में नेता विपक्ष ब्राह्मण और विधान परिषद में नेता विपक्ष यादव बिरादरी से। अब अगर सपा संगठन पर ही नजर डाले तो कोई पसमांदा मुस्लिम अदने से पद पर नही है। इस तरह पीडीए का जो राग अलापा गया इसके अनुसार न पिछड़े और दलित को साधा गया और न ही पसमांदा मुस्लिम को। फिर यह कैसा पीडीए है इसके मतलब क्या हैं यह स्वयं अखिलेश यादव ही बता सकेंगे।राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि असल में सपा को धोखा देना, गफलत में रखना और मतलब निकालना बेहतर ढंग से आता है और इस दल के नेता इसी फितरत के मालिक हैं।वही पसमांदा मुस्लिम जो सपा को सरकार तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा करता रहा और आंख बंद कर भरोसा किया। उसी के साथ सपा सिर्फ खेल करती रही, मजाक बनाकर रख दिया।पसमांदा मुस्लिम आज तक यह नहीं समझ सका कि आखिर उसने सपा का क्या नुकसान किया है।वह तो बस साथ निभाता गया।अब इसे तथाकथित समाजवाद और खोखली धर्मनिरपेक्षता नही तो भला और क्या कहा जाएगा।
