सत्ता में आने का लालच दो दलों को एक बार फिर साथ तो ले आया पर दिल अब तक नही मिल सके वसीम राईन
रिपोर्ट-अज़मी रिज़वी-अकरम खान
बाराबंकी। सत्ता में आने का लालच दो दलों को एक बार फिर साथ तो ले आया पर दिल अब तक नही मिल सके। इसकी वजह यह कि दोनों ही दलों के नेताओं की नीयत में खोट ही खोट है। महागठबंधन वास्तव में ठगबंधन साबित हुआ और चुनाव से पहले ही यह बंधन ताश के पत्तो की तरह ढह गया। पीएम बनने की चाहत ने सबके असली चेहरे उजागर कर दिए और सच सामने आ गया।यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने अपने बयान में कही। उन्होंने कहा कि केवल एक दल के खिलाफ दर्जनों दलों के एकजुट होना भी किसी काम नही आया क्योंकि इनके जुटने के पीछे की वजह ही कुछ और रही, असल संघर्ष प्रधानमंत्री पद पर बैठना था और इसकी दावेदारी हर दल कर रहा था। इनके इरादों को कुचलने के लिए राहुल अखिलेश की जोड़ी बन गई। महागठबंधन के भीतर एक और संघर्ष छिड़ गया जिसके जनक राहुल अखिलेश बने। 85 फीसदी पसमांदा समाज को बेवकूफ बनाकर सत्ता की चाभी बनाते आये दोनों दलों के राजकुमार नीति और नीयत के नाम पर पुराने दागी है। वही जोड़ी लेकर यह दोनों यूपी में सक्रिय हो गए पर यह दोनों अपने मकसद में कभी सफल नही होने वाले। इस चुनाव में कांग्रेस व सपा अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करते नजर आएंगे जैसा कि पूर्व में होता रहा है। राहुल गांधी को एक बार फिर अपने नेतृत्व वाले रवैये पर विचार करना होगा।राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहाकि वास्तव में यह महागठबंधन भ्रष्ट बेईमान ऐश्वर्य भोगी नेताओं की जमात है।जिनमे राहुल अखिलेश सबका नेतृत्व करते हैं। इनकी जोड़ी पहले भी बनी पर असफल रही।एक बार फिर दोनों साथ हैं क्योंकि राहुल व अखिलेश के लिए एक दूसरे का साथ करना मजबूरी है।अलग अलग रहने से इनका कोई वजूद नही है। वक़्त खुद को दोहरा रहा है कभी पसमांदा समाज इन दोनो नेताओ से हक़ व हुकूक की उम्मीद रखता था।कांग्रेस हो या सपा किसी ने लोकसभा चुनाव में पसमांदा से अंसारी या राईन बिरादरी को टिकट नही दिया। यही नही इन्हें संगठन में भागीदारी से भी वंचित रखा। आज हालात यह हैं कि दोनों ही नेता अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रहे हैं पर दोनों ही एक बार फिर मुंह के बल गिरेंगे।
